मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

असहनीय उमस। कोई बारात भी उत्सवार्थ यात्रा कर रही होती तो भी उसे यात्रा सुखद नहीं लगती। तिसपर मैं तो कालेपानी के आजीवन कारावास के लिए जा रहा था। डिब्बे के बाहर मोगलाई मैदान आंवे की तरह तप रहे थे। भीतर उस डिब्बे में उमस की उतनी ही तीव्रता से अंग-अंग छअपटा रहा था और उस ऊष्मा की तीव्रता तथा छअपटाहट उतनी ही असहनीय थी जितनी अंतःकरण स्थिति ऊष्मा की। इस स्थिति में वह रेल मोगलाई मैदान में से होती मद्रास चली।

जब मन अधिक टूटता


175 of 2228

असहनीय उमस। कोई बारात भी उत्सवार्थ यात्रा कर रही होती तो भी उसे यात्रा सुखद नहीं लगती। तिसपर मैं तो कालेपानी के आजीवन कारावास के लिए जा रहा था। डिब्बे के बाहर मोगलाई मैदान आंवे की तरह तप रहे थे। भीतर उस डिब्बे में उमस की उतनी ही तीव्रता से अंग-अंग छअपटा रहा था और उस ऊष्मा की तीव्रता तथा छअपटाहट उतनी ही असहनीय थी जितनी अंतःकरण स्थिति ऊष्मा की। इस स्थिति में वह रेल मोगलाई मैदान में से होती मद्रास चली।

जब मन अधिक टूटता


175 of 2228