मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

वह रेल का अधिकारी हो या पुलिस का । वह हर दो-तीन स्टेशनों के प्श्चात् उन आधिकारियों में, जो मेरी निगरानी के लिए नियुक्त किए गए थे, किसी एक से कुछ बात करके मुझे देखकर वापस लौटता। संभवतः अब वह मुझे छोड़कर वापस लौट रहा हो। मेरे पास आकर वह बात करने लगा, उसका गला रूंधा हुआ था, ‘‘ळववक इलमए थ्तपमदक! ( अलविदा मित्र!) मुझे लगता है, आप प्रभु कृपा से दिसंबर में राज्यारोहण के


समय मुक्त होंगे।’’ मैंने कहा, ‘‘ आपकी शुभकामना के लिए


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वह रेल का अधिकारी हो या पुलिस का । वह हर दो-तीन स्टेशनों के प्श्चात् उन आधिकारियों में, जो मेरी निगरानी के लिए नियुक्त किए गए थे, किसी एक से कुछ बात करके मुझे देखकर वापस लौटता। संभवतः अब वह मुझे छोड़कर वापस लौट रहा हो। मेरे पास आकर वह बात करने लगा, उसका गला रूंधा हुआ था, ‘‘ळववक इलमए थ्तपमदक! ( अलविदा मित्र!) मुझे लगता है, आप प्रभु कृपा से दिसंबर में राज्यारोहण के


समय मुक्त होंगे।’’ मैंने कहा, ‘‘ आपकी शुभकामना के लिए


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