वह छोटी नौका, जो मुझे लेकर आई थी, अंदमान से आई हुई ‘महाराजा’ नामक विशाल वाष्पनौका से सट गई। मुझे हथकड़ी पड़ी हुई थी ही। उसके साथ ही उस जलयान की सीढ़ी पर कडे़ पहरे में मुझे चढ़ाया गया। मैं ऊपर चढ़ ही रहा था कि उस समय जहाज में सवार हुए यात्री, नौकर-चाकर, अधिकारी तथा आस-पास की छोटी-छोटी नौकाओं में सवार होकर आए हुए दर्शक वह दृश्य देखने के लिए धक्कम-धक्का करने लगे और अंदमान के उस जहाज पर मुझे सवार होते हुए ऐसे देखने लगे जैसे
वह छोटी नौका, जो मुझे लेकर आई थी, अंदमान से आई हुई ‘महाराजा’ नामक विशाल वाष्पनौका से सट गई। मुझे हथकड़ी पड़ी हुई थी ही। उसके साथ ही उस जलयान की सीढ़ी पर कडे़ पहरे में मुझे चढ़ाया गया। मैं ऊपर चढ़ ही रहा था कि उस समय जहाज में सवार हुए यात्री, नौकर-चाकर, अधिकारी तथा आस-पास की छोटी-छोटी नौकाओं में सवार होकर आए हुए दर्शक वह दृश्य देखने के लिए धक्कम-धक्का करने लगे और अंदमान के उस जहाज पर मुझे सवार होते हुए ऐसे देखने लगे जैसे