रो मत। कालेपानी में रोने से कुछ नहीं होता। ’ इस तरह इन दंडितों में से जो छंटे हुए बदमाश अपराधी थे, दार्शनिक की तरह बीचोबीच खड़े होकर सभी को सांतवना दे रहे थे। बीच ही में किसी ने मेरी ओर संकेत करते हुए कहा,‘‘ देखो भैया, तुम्हारी-हमारी छोड़ो। वह देखो, बालिस्टर साहज! भई, अंग्रेज अफसर भी टोपी उतारकर इन्हें प्रणाम करते हैं। भला इनके दुःख के सामने हमारा दुःख क्या है?’’ इतना कहने की देर थी कि धीरे-धीरे सभी मेरे इर्दगिर्द जम गए।
रो मत। कालेपानी में रोने से कुछ नहीं होता। ’ इस तरह इन दंडितों में से जो छंटे हुए बदमाश अपराधी थे, दार्शनिक की तरह बीचोबीच खड़े होकर सभी को सांतवना दे रहे थे। बीच ही में किसी ने मेरी ओर संकेत करते हुए कहा,‘‘ देखो भैया, तुम्हारी-हमारी छोड़ो। वह देखो, बालिस्टर साहज! भई, अंग्रेज अफसर भी टोपी उतारकर इन्हें प्रणाम करते हैं। भला इनके दुःख के सामने हमारा दुःख क्या है?’’ इतना कहने की देर थी कि धीरे-धीरे सभी मेरे इर्दगिर्द जम गए।