मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

प्रायः सभी को ज्ञात ािा कि मुझे पचास वर्षो का दंड मिला है, तथापि हर कोई पूछता-कितने वर्षो का दंड

मैंने अपने गले में लटका हुआ क्रमांक का वह बिल्ला ही उनके हाथों में थमा दिया। बार-बार ‘पचास-पचास की रट लगाते हुए मैं ऊब सा गया था। यह सुनकर कि सचमुच ही मुझे पचास वर्षों का दंड हुआ है-केवल उन्हें ही नहीं अपितु सहÛाधिक दंडितों को भी, जिनकी पंद्रह बरस के दंड से ही सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई थी, धीरज बंधता। उन सभी बंदियों का दुःख मुझे देखते ही हलका हो जाता।


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प्रायः सभी को ज्ञात ािा कि मुझे पचास वर्षो का दंड मिला है, तथापि हर कोई पूछता-कितने वर्षो का दंड

मैंने अपने गले में लटका हुआ क्रमांक का वह बिल्ला ही उनके हाथों में थमा दिया। बार-बार ‘पचास-पचास की रट लगाते हुए मैं ऊब सा गया था। यह सुनकर कि सचमुच ही मुझे पचास वर्षों का दंड हुआ है-केवल उन्हें ही नहीं अपितु सहÛाधिक दंडितों को भी, जिनकी पंद्रह बरस के दंड से ही सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई थी, धीरज बंधता। उन सभी बंदियों का दुःख मुझे देखते ही हलका हो जाता।


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