आया कि नाक सड़ गई। मैंने अपनी नाक जोर से दबाकर बंद की। यह देख निकट के एक बंदी ने संकेत किया कि धंुधले उजाले में रखा वह पीपा देखो। देख तो ज्ञात हुआ कि यह पीपा ही रात भर सभी प्राणियों को शौचकूप के स्ािान पर काम आनेवाला है। मेरी दृष्टि उधर जाते ही वह बंदी, जो उस पीपे पर बैठा था, बेचारा संकोचवश उठने लगा। परंतु मैंने संकेत से उसे बैठने के लिए कहा, ‘‘अरे, यह तो देहधर्म है। भला इसमें लज्जा कैसी? थोड़े समयोपरांत मुझे भी उधर ही
आया कि नाक सड़ गई। मैंने अपनी नाक जोर से दबाकर बंद की। यह देख निकट के एक बंदी ने संकेत किया कि धंुधले उजाले में रखा वह पीपा देखो। देख तो ज्ञात हुआ कि यह पीपा ही रात भर सभी प्राणियों को शौचकूप के स्ािान पर काम आनेवाला है। मेरी दृष्टि उधर जाते ही वह बंदी, जो उस पीपे पर बैठा था, बेचारा संकोचवश उठने लगा। परंतु मैंने संकेत से उसे बैठने के लिए कहा, ‘‘अरे, यह तो देहधर्म है। भला इसमें लज्जा कैसी? थोड़े समयोपरांत मुझे भी उधर ही