बैठना होगा। किसी को भी संकोच करने की आवश्यकता नहीं है। ऐसा नहीं कि मेरी नाक है और तुम्हारी नहीं है, तो फिर तुम लोगों से अधिक भला मुझे यह गंदगी असहनीय क्यों लगे?’’ उन दंडितों में एक पुराना घाघ मेरे निकट आकर कहने लगा,‘‘दादा, हम इसके आदी हो चुके हैं। मैं कालेपानी से ही आ रहा हूं।’’ उसकी उदारता को मैंने मन से सराहा। मैंने सोचा, ‘हे प्रभो, इन पतितों के अंतःकरण के आंगन में भी एक सुंदर सा तुलसी वृंदावन होता है।’’
मैंने उस घुटे डाकू को धन्यवाद दिया और कहा,
बैठना होगा। किसी को भी संकोच करने की आवश्यकता नहीं है। ऐसा नहीं कि मेरी नाक है और तुम्हारी नहीं है, तो फिर तुम लोगों से अधिक भला मुझे यह गंदगी असहनीय क्यों लगे?’’ उन दंडितों में एक पुराना घाघ मेरे निकट आकर कहने लगा,‘‘दादा, हम इसके आदी हो चुके हैं। मैं कालेपानी से ही आ रहा हूं।’’ उसकी उदारता को मैंने मन से सराहा। मैंने सोचा, ‘हे प्रभो, इन पतितों के अंतःकरण के आंगन में भी एक सुंदर सा तुलसी वृंदावन होता है।’’
मैंने उस घुटे डाकू को धन्यवाद दिया और कहा,