‘‘खुली हवा के लिए डाॅक्टर ने मुझे यह विशेष सुविधा दी है कि मैं सलाखों के पास सो जांऊ। इस पीपे की बात पर उन्होंने गौर नहीं किया। परंतु मैं इसे भी एक विशेष सुविधा समझता हूं। आप चिंता न करें। भला आपको इस गंदगी में ढकेलकर मैं उधर क्यों जाऊं? मुझे भी अब इस तरह के जीवन का आदी होना होगा।’’ रात में एक के पीछे एक बंदी उस पीपे पर आने-जाने लगा। गंदगी तथा घिनौने दृश्य की चरम सीमा हो गई। मैंने अपनी आंखे बंद करके सोने का स्वांग रचाया,
‘‘खुली हवा के लिए डाॅक्टर ने मुझे यह विशेष सुविधा दी है कि मैं सलाखों के पास सो जांऊ। इस पीपे की बात पर उन्होंने गौर नहीं किया। परंतु मैं इसे भी एक विशेष सुविधा समझता हूं। आप चिंता न करें। भला आपको इस गंदगी में ढकेलकर मैं उधर क्यों जाऊं? मुझे भी अब इस तरह के जीवन का आदी होना होगा।’’ रात में एक के पीछे एक बंदी उस पीपे पर आने-जाने लगा। गंदगी तथा घिनौने दृश्य की चरम सीमा हो गई। मैंने अपनी आंखे बंद करके सोने का स्वांग रचाया,