त्रैलिंग स्वामी पर न्यायलय में अशिष्ट व्यवहार के लिए जब अभियोग लगाया गया था, तब उनके साधुत्व की खिल्ली उड़ाने के लिए मजिस्टेªट ने व्यंग्य किया, ‘‘परंतु ये अद्वैतवादी
भोजन के समय अन्न ही क्यों ग्रहण करते हैं? गोबर क्यों नहीं खाते?’’ इस पर त्रैलिंग स्वामी हंसे और वहीं पर शौच करके, जब तक लोग सफाई को आते, देखते-देखते उसे खा गए।
रामकृष्ण परमहंस
रामकृष्ण परमहंस के विषय में भी इसी तरह की आख्यायिका है। अपनी अद्वैतानुभूति
त्रैलिंग स्वामी पर न्यायलय में अशिष्ट व्यवहार के लिए जब अभियोग लगाया गया था, तब उनके साधुत्व की खिल्ली उड़ाने के लिए मजिस्टेªट ने व्यंग्य किया, ‘‘परंतु ये अद्वैतवादी
भोजन के समय अन्न ही क्यों ग्रहण करते हैं? गोबर क्यों नहीं खाते?’’ इस पर त्रैलिंग स्वामी हंसे और वहीं पर शौच करके, जब तक लोग सफाई को आते, देखते-देखते उसे खा गए।
रामकृष्ण परमहंस
रामकृष्ण परमहंस के विषय में भी इसी तरह की आख्यायिका है। अपनी अद्वैतानुभूति