के सारे साधन समाप्त होने के पश्चात् एक अंतिम कठिन साधना के रूप में कलकत्ता में वे उस स्ािान पर गए जहां मैला डाला जाता है। वहां पड़ी विष्ठा को अपने हाथों से उलट-पुलट करते हुए उन्होंने पांच काड़़ी भरकर विष्ठा मुंह में डाल ली। और एक तू ही कि इन दंडितों के विष्ठा करते समय उस दुर्गंध से डरकर उस गंदगी भरे पीपे से दूर भागना चाहता है। अन्य लोगों की विष्ठा के पीपे से चाहे कितना भी दूर भागो, तथापि उसका क्या करोगे जो तुम्हें अपनी
के सारे साधन समाप्त होने के पश्चात् एक अंतिम कठिन साधना के रूप में कलकत्ता में वे उस स्ािान पर गए जहां मैला डाला जाता है। वहां पड़ी विष्ठा को अपने हाथों से उलट-पुलट करते हुए उन्होंने पांच काड़़ी भरकर विष्ठा मुंह में डाल ली। और एक तू ही कि इन दंडितों के विष्ठा करते समय उस दुर्गंध से डरकर उस गंदगी भरे पीपे से दूर भागना चाहता है। अन्य लोगों की विष्ठा के पीपे से चाहे कितना भी दूर भागो, तथापि उसका क्या करोगे जो तुम्हें अपनी