मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

ने अनुरोध किया कि मैं कुछ खाने के लिए ले लूं। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या मांगू? और मुझे अकेले को देना भी कठिन था। अंत में कुछ उदार व्यापारियों ने कप्तान की आज्ञा प्राप्त करके सभी बंदियों के लिए भात, मछली और अचार आादि व्यंजन तैयार करवाए। मेरे कारण दो दिन के अनशन के पश्चात् ऐसा भोजन प्राप्त हुआ जो कभी नहीं मिलता था, इसलिए सभी बंदी बांसों उछल पड़े। मेरे साथ ही उन्हें घंटा-आधे घंटे के लिए उस घुटन भरे तंग तलमंजिले पिंजरे


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ने अनुरोध किया कि मैं कुछ खाने के लिए ले लूं। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या मांगू? और मुझे अकेले को देना भी कठिन था। अंत में कुछ उदार व्यापारियों ने कप्तान की आज्ञा प्राप्त करके सभी बंदियों के लिए भात, मछली और अचार आादि व्यंजन तैयार करवाए। मेरे कारण दो दिन के अनशन के पश्चात् ऐसा भोजन प्राप्त हुआ जो कभी नहीं मिलता था, इसलिए सभी बंदी बांसों उछल पड़े। मेरे साथ ही उन्हें घंटा-आधे घंटे के लिए उस घुटन भरे तंग तलमंजिले पिंजरे


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