मैं भी अंश भागी होऊंगा। कितना महान् कितना उज्जवल है यह भविष्य काल!
प्रस्तुत स्थिति
परंतु वर्तमान! तुम्हारी प्रस्तुत स्थिति? स्वप्न, स्वप्न! अरे मूर्ख, तुम्हें आ रहे भविष्य के ये सपने केवल स्वप्न ही होंगे। वैदिक काल से ऐसे स्वप्न देखते-देखते मनुष्य को युग बीत गए। भविष्य के उन सुनहरे सपनों का उपयोग वर्तमान की रात्रि के घनघोर मोहांधकर में पल भर के लिए प्रकाश देना ही है। इस सागर को ही देखो- कितनी अविस्मरणीय, अगम्य राक्षसी
मैं भी अंश भागी होऊंगा। कितना महान् कितना उज्जवल है यह भविष्य काल!
प्रस्तुत स्थिति
परंतु वर्तमान! तुम्हारी प्रस्तुत स्थिति? स्वप्न, स्वप्न! अरे मूर्ख, तुम्हें आ रहे भविष्य के ये सपने केवल स्वप्न ही होंगे। वैदिक काल से ऐसे स्वप्न देखते-देखते मनुष्य को युग बीत गए। भविष्य के उन सुनहरे सपनों का उपयोग वर्तमान की रात्रि के घनघोर मोहांधकर में पल भर के लिए प्रकाश देना ही है। इस सागर को ही देखो- कितनी अविस्मरणीय, अगम्य राक्षसी