जो जोंकों की तरह ही नहीं अपतिु उनसे भी घातक होते हैं।-बसेरा होताा है। ये एक हाथ लंबे तथा एक इंच से मोटे विषैले होते हैं कि उनके डसने से मनुष्य को लकवा मार जाता है और भाषण वेदना हुए बिना नहीं रहती। यहां साॅंप बहुत ही कम हैं, तथापि ‘वाइपर’ नामक अत्यंत विषैला एक छोटा सा-साॅंप मिलता है, कभी-कभी अजगर भी मिलते हैं। सदियों से इन जंगलों में किसी भी मनुष्य का अधिक प्रवेश न होने के कारण इन सब प्राणियों की अत्यधिक वृद्वि होती रही है,
जो जोंकों की तरह ही नहीं अपतिु उनसे भी घातक होते हैं।-बसेरा होताा है। ये एक हाथ लंबे तथा एक इंच से मोटे विषैले होते हैं कि उनके डसने से मनुष्य को लकवा मार जाता है और भाषण वेदना हुए बिना नहीं रहती। यहां साॅंप बहुत ही कम हैं, तथापि ‘वाइपर’ नामक अत्यंत विषैला एक छोटा सा-साॅंप मिलता है, कभी-कभी अजगर भी मिलते हैं। सदियों से इन जंगलों में किसी भी मनुष्य का अधिक प्रवेश न होने के कारण इन सब प्राणियों की अत्यधिक वृद्वि होती रही है,