समुद्री आश्चर्य की तो कोई सीमा ही नहीं। शंख, सीपियां, पत्थर, कितनी रंग-बिरंगी सुंदर आकृतियांॅ, कितने प्रकारए मानो विश्वकर्मा का वैचिन्न्य हो! उसकी शोभा का वर्णन कैसे किया जाए?
ऐसे रंग की सीपियां, शंख कि जिनके इंद्रधनुष की शोभा भी लज्जा से शीश झुकाए। उनमें कम-से-कम एक की सुंदरता भी कोई कुशल चितेरा किसी चित्र में उंॅडेल सके तो मनुष्य उस कलाकृति को प्रदर्शनियों में सदियों तक सजाकर रखेगा। इस तरह की अनेक सुंदर-सुंदर वस्तुएं ही नहीं अपितु प्रणियों की भी रचना,
समुद्री आश्चर्य की तो कोई सीमा ही नहीं। शंख, सीपियां, पत्थर, कितनी रंग-बिरंगी सुंदर आकृतियांॅ, कितने प्रकारए मानो विश्वकर्मा का वैचिन्न्य हो! उसकी शोभा का वर्णन कैसे किया जाए?
ऐसे रंग की सीपियां, शंख कि जिनके इंद्रधनुष की शोभा भी लज्जा से शीश झुकाए। उनमें कम-से-कम एक की सुंदरता भी कोई कुशल चितेरा किसी चित्र में उंॅडेल सके तो मनुष्य उस कलाकृति को प्रदर्शनियों में सदियों तक सजाकर रखेगा। इस तरह की अनेक सुंदर-सुंदर वस्तुएं ही नहीं अपितु प्रणियों की भी रचना,