जिनकी रेलपेल समुद्र तट पर उन्मुक्तः इधर-उधर बिखरी होती है। जैसे सम्राट हर्ष के किसी मार्ग से चलते समय बरसाए गए सुवर्ण मोतियांे के फूल इधर-उधर बिखरे होते थे, उसी तरह शंख, सीपियों तथा सुंदर पत्थरों पर कोई चितेरा अपनी तूलिका से एक-एक अव्यवस्थित कुशलता की फटकार निश्चित ही इस समुद्र तट पर बिखेरता है। विविध
मछलियां-मगरमच्छ! स्मुद्र स्थित किसी मत्स्य की पूंॅछ से एक ऐसा तीक्ष्ण सिरे का चाबुक जुड़ा हुआ कि जिसकी एक फटकार से टांगों
जिनकी रेलपेल समुद्र तट पर उन्मुक्तः इधर-उधर बिखरी होती है। जैसे सम्राट हर्ष के किसी मार्ग से चलते समय बरसाए गए सुवर्ण मोतियांे के फूल इधर-उधर बिखरे होते थे, उसी तरह शंख, सीपियों तथा सुंदर पत्थरों पर कोई चितेरा अपनी तूलिका से एक-एक अव्यवस्थित कुशलता की फटकार निश्चित ही इस समुद्र तट पर बिखेरता है। विविध
मछलियां-मगरमच्छ! स्मुद्र स्थित किसी मत्स्य की पूंॅछ से एक ऐसा तीक्ष्ण सिरे का चाबुक जुड़ा हुआ कि जिसकी एक फटकार से टांगों