करता। मन में उनका वह पूज्यभाव देखकर कभी अच्छा लगता, पर कभी ं ं ं ं ऐसे विचार आते। एक दिन मुझे सामने के घर के एक निवासी को पुलिस द्वारा धमकाने का समाचार मिला।
मेरे कारण दूसरों को कश्ट न हो, इसलिए तब मैं यथासंभव आंखे नीची करके टहलता था। इस व्यायाम के समय मुंह से योगसूत्र का पाठ करता और इसके पश्चात् उसके एक-एक सूत्र पर विचार करते हुए उसकी छानबीन करता। आज भी नित्य क्रमानुसार इसी तरह के विचारों में उलझा हुआ मैं व्यायाम कर
करता। मन में उनका वह पूज्यभाव देखकर कभी अच्छा लगता, पर कभी ं ं ं ं ऐसे विचार आते। एक दिन मुझे सामने के घर के एक निवासी को पुलिस द्वारा धमकाने का समाचार मिला।
मेरे कारण दूसरों को कश्ट न हो, इसलिए तब मैं यथासंभव आंखे नीची करके टहलता था। इस व्यायाम के समय मुंह से योगसूत्र का पाठ करता और इसके पश्चात् उसके एक-एक सूत्र पर विचार करते हुए उसकी छानबीन करता। आज भी नित्य क्रमानुसार इसी तरह के विचारों में उलझा हुआ मैं व्यायाम कर