मनुष्य की मृत्यु के पश्चात् वे शव को कुछ दिन के लिए एक वृक्ष पर टांग देते हैं। कहते हैं, फिर उसे पत्थर मारकर नीचे गिराते हैं। उनकी धर्म विषयक संकल्पनाओं की कुछ भी विश्वसनीय जानकारी अभी तक संकलित नहीं है, तथापि भूत-प्रेत और भय के आगे उनके धर्म विषयक विचारों का विकास हुआ प्रतीत नही होता। उनमें एक जनजाति अनेक धर्म विषयक विचारों का विकास हुआ प्रतीत नहीं होता। उनमें एक जनजाति अनेक वर्ष अंगे्रजों की शरण में आकर उनके आश्रय में रही,
मनुष्य की मृत्यु के पश्चात् वे शव को कुछ दिन के लिए एक वृक्ष पर टांग देते हैं। कहते हैं, फिर उसे पत्थर मारकर नीचे गिराते हैं। उनकी धर्म विषयक संकल्पनाओं की कुछ भी विश्वसनीय जानकारी अभी तक संकलित नहीं है, तथापि भूत-प्रेत और भय के आगे उनके धर्म विषयक विचारों का विकास हुआ प्रतीत नही होता। उनमें एक जनजाति अनेक धर्म विषयक विचारों का विकास हुआ प्रतीत नहीं होता। उनमें एक जनजाति अनेक वर्ष अंगे्रजों की शरण में आकर उनके आश्रय में रही,