बसाकर रहने की अनुमति दी जाती । ठेठ बंदियों जैसे व्यवहार से उन्हें तंग नहीं किया गया था। इस प्रकार अंदमान में राजनीतिक अथवा सार्वजनिक आंदोलन में दंड प्राप्त सैकड़ों राजनीतिक दंडित प्राचीन काल से कष्टमय दिन बिता रहे हैं, तथापि उनके कष्टों अथवा अंदमान की कहानी हिंदुस्थान के ह्नदयपटल पर अंकित होने का संयोग तब जुड़ नहीं सका। अर्वाचीन क्राांतिकारियों के निर्वासन से यह संयोग बना और भारतीय दिलों को अब इस बात का एहसास हो रहा है कि अपने धर्म,
बसाकर रहने की अनुमति दी जाती । ठेठ बंदियों जैसे व्यवहार से उन्हें तंग नहीं किया गया था। इस प्रकार अंदमान में राजनीतिक अथवा सार्वजनिक आंदोलन में दंड प्राप्त सैकड़ों राजनीतिक दंडित प्राचीन काल से कष्टमय दिन बिता रहे हैं, तथापि उनके कष्टों अथवा अंदमान की कहानी हिंदुस्थान के ह्नदयपटल पर अंकित होने का संयोग तब जुड़ नहीं सका। अर्वाचीन क्राांतिकारियों के निर्वासन से यह संयोग बना और भारतीय दिलों को अब इस बात का एहसास हो रहा है कि अपने धर्म,