जाति तथा राष्ट्र के सहÛों वंशज और अशंज अंदमान में बसे हुए हैं। उन भारतीय उपनिवेशियों का अपने प्रेम, आत्मीयता तथा कर्तव्य पर उतना ही अधिकार है जितना भारत के किसी भी एक राज्य का। यह बात भारतीय दिलों में अभी भले ही धुंधली सी हो, परंतु आने अवश्य लगी है।
पोर्ट ब्लेअर
‘पोर्ट ब्लेअर’ इस उपनिवेश का प्रमुख बंदरगाह और द्वीप है। अंदमान में भारतीय और ब्रह्मी लोगों के बंदियों का उपनिवेश होने से इन साठ-सत्तर वर्षों में ही वहां
जाति तथा राष्ट्र के सहÛों वंशज और अशंज अंदमान में बसे हुए हैं। उन भारतीय उपनिवेशियों का अपने प्रेम, आत्मीयता तथा कर्तव्य पर उतना ही अधिकार है जितना भारत के किसी भी एक राज्य का। यह बात भारतीय दिलों में अभी भले ही धुंधली सी हो, परंतु आने अवश्य लगी है।
पोर्ट ब्लेअर
‘पोर्ट ब्लेअर’ इस उपनिवेश का प्रमुख बंदरगाह और द्वीप है। अंदमान में भारतीय और ब्रह्मी लोगों के बंदियों का उपनिवेश होने से इन साठ-सत्तर वर्षों में ही वहां