मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

’’ कुछ नहीं, बस यूं ही। कानूनी तौर पर कुछ-न-कुछ काम तो देना ही है। आपसे जितना बने कीजिए,उसकी कोई चिंता नहीं है।’’

उसने उस बोझे को नीचे उतारा। उसे खोला और उसके टुकड़े टुकड़े किए। फिर मुझे दिखाया कि किस किस तरह उसे ठोक-धुनकर उसकी रस्सी बनाई जाती है। तो फिर यह है-सश्रम कारावास।

जगत् का पिश्टपेशण

हूं-चलो, करो इसका सामना। बस, नारियल की जटाएं ही तो कूटनी हैं न! हां रे, पागल मनुआ! भला इसमें ओछापन कैसा? इससे क्या जीवन व्यर्थ जाता है? भई,


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’’ कुछ नहीं, बस यूं ही। कानूनी तौर पर कुछ-न-कुछ काम तो देना ही है। आपसे जितना बने कीजिए,उसकी कोई चिंता नहीं है।’’

उसने उस बोझे को नीचे उतारा। उसे खोला और उसके टुकड़े टुकड़े किए। फिर मुझे दिखाया कि किस किस तरह उसे ठोक-धुनकर उसकी रस्सी बनाई जाती है। तो फिर यह है-सश्रम कारावास।

जगत् का पिश्टपेशण

हूं-चलो, करो इसका सामना। बस, नारियल की जटाएं ही तो कूटनी हैं न! हां रे, पागल मनुआ! भला इसमें ओछापन कैसा? इससे क्या जीवन व्यर्थ जाता है? भई,


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