इस बात के लिए प्रयत्नरत होते हुए भी कि स्कूलों में हिंदी भाषा पढ़ाई जाए- दैनंदिन लेखन की भाषा उर्दू ही है। इतना ही नहीं, भारतीय अथवा हिंदू बच्चों को भी स्कूलों में मातृभाषा नहीं पढ़ाई जाती, शिक्षा का माध्यम अभी भी उर्दू रखा गया है। ये और इस तरह की अनेक बातों की ओर जो कोई संगठक वहां जाए तो
वहां के अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कर उचित व्यवस्था करे।
अंदमान की समस्त स्थिति का विवरण और उसे सुधारने के उपायों का उल्लेख आगे यथास्थान आएगा,
इस बात के लिए प्रयत्नरत होते हुए भी कि स्कूलों में हिंदी भाषा पढ़ाई जाए- दैनंदिन लेखन की भाषा उर्दू ही है। इतना ही नहीं, भारतीय अथवा हिंदू बच्चों को भी स्कूलों में मातृभाषा नहीं पढ़ाई जाती, शिक्षा का माध्यम अभी भी उर्दू रखा गया है। ये और इस तरह की अनेक बातों की ओर जो कोई संगठक वहां जाए तो
वहां के अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कर उचित व्यवस्था करे।
अंदमान की समस्त स्थिति का विवरण और उसे सुधारने के उपायों का उल्लेख आगे यथास्थान आएगा,