का बेड़ा अंदमान के प्रांगण में समुद्री दुर्ग के आगे पहरा देता हुआ मेरी कल्पना तरंग में लहराने ही लगा था कि एक सिपाही बड़ी उद्दंडतापूर्वक दहाड़ा,‘‘चलो, उठाओ बिस्तरा!’’ क्यांेकि एक यूरोपियन अधिकारी
निकट ही खड़ा था। प्रत्येक हिंदू भारतीय पुलिस सिपाही तथा सैनिक की यही धारणा हो जाती है कि अंगे्रजों के सामने भारतीय राजनीतिक बंदियों के साथ जितना अधिक उद्दंडातापूर्वक व्यवहार करें
उतना ही अपनी पदोन्नति के लिए लाभदायक सिद्व होगा।
का बेड़ा अंदमान के प्रांगण में समुद्री दुर्ग के आगे पहरा देता हुआ मेरी कल्पना तरंग में लहराने ही लगा था कि एक सिपाही बड़ी उद्दंडतापूर्वक दहाड़ा,‘‘चलो, उठाओ बिस्तरा!’’ क्यांेकि एक यूरोपियन अधिकारी
निकट ही खड़ा था। प्रत्येक हिंदू भारतीय पुलिस सिपाही तथा सैनिक की यही धारणा हो जाती है कि अंगे्रजों के सामने भारतीय राजनीतिक बंदियों के साथ जितना अधिक उद्दंडातापूर्वक व्यवहार करें
उतना ही अपनी पदोन्नति के लिए लाभदायक सिद्व होगा।