देख भविष्य में स्वाधीन होनेवाले भारत के कठोर एवं विवश वर्तमान के उस ‘चलो, उठाओ बिस्तर का सामना करने के लिए मैं झट से तैयार हो गया। मुझे घाट से निकलकर एक चढ़ाई पर चढ़ने का आदेश दिया गया। पर बेड़ियों से जकड़े हुए नंगे पैरों के कारण चढ़ने में विलंब होने लगा। सिपाही से कहा, ‘चलने दो उसे, जल्दी क्यों मचा रहे हो?’’ चढ़ते समय मेरे मन में एक ही विचार मंडरा रहा था,‘ सागर से यह राह चलकर मैं ऊपर चढ़ रहा हूं जो अंदमान जाती हैं अंदमान से
देख भविष्य में स्वाधीन होनेवाले भारत के कठोर एवं विवश वर्तमान के उस ‘चलो, उठाओ बिस्तर का सामना करने के लिए मैं झट से तैयार हो गया। मुझे घाट से निकलकर एक चढ़ाई पर चढ़ने का आदेश दिया गया। पर बेड़ियों से जकड़े हुए नंगे पैरों के कारण चढ़ने में विलंब होने लगा। सिपाही से कहा, ‘चलने दो उसे, जल्दी क्यों मचा रहे हो?’’ चढ़ते समय मेरे मन में एक ही विचार मंडरा रहा था,‘ सागर से यह राह चलकर मैं ऊपर चढ़ रहा हूं जो अंदमान जाती हैं अंदमान से