इस धरा के किसी पुच्छल तारे से टकराने भर की देरी है कि पुनः तेजोमेध-सभी निरर्थक! डसी प्रकार उसी का और उसी के एक आवश्यक एवं अपरिहार्य अटल हिस्से के रूप में बनी-बनाई बंधी हुई रस्सी खोलकर उसे कूटना-यह है हमारा पिश्टपेशण। यदि वह महान पिश्टपेशण महत्तवपूर्ण हो, कुछ असहमति रखता हो, यदि उसमें जीवन निरर्थक न हो, तो यह भी एक छोटा सा पिश्टपेशण कर्तव्य ही है, क्योंकि उस महान् पिश्टपेशण का यह भी एक अपरिहार्य अंग है। कारण वह घट रह है।
इस धरा के किसी पुच्छल तारे से टकराने भर की देरी है कि पुनः तेजोमेध-सभी निरर्थक! डसी प्रकार उसी का और उसी के एक आवश्यक एवं अपरिहार्य अटल हिस्से के रूप में बनी-बनाई बंधी हुई रस्सी खोलकर उसे कूटना-यह है हमारा पिश्टपेशण। यदि वह महान पिश्टपेशण महत्तवपूर्ण हो, कुछ असहमति रखता हो, यदि उसमें जीवन निरर्थक न हो, तो यह भी एक छोटा सा पिश्टपेशण कर्तव्य ही है, क्योंकि उस महान् पिश्टपेशण का यह भी एक अपरिहार्य अंग है। कारण वह घट रह है।