मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

इस धरा के किसी पुच्छल तारे से टकराने भर की देरी है कि पुनः तेजोमेध-सभी निरर्थक! डसी प्रकार उसी का और उसी के एक आवश्यक एवं अपरिहार्य अटल हिस्से के रूप में बनी-बनाई बंधी हुई रस्सी खोलकर उसे कूटना-यह है हमारा पिश्टपेशण। यदि वह महान पिश्टपेशण महत्तवपूर्ण हो, कुछ असहमति रखता हो, यदि उसमें जीवन निरर्थक न हो, तो यह भी एक छोटा सा पिश्टपेशण कर्तव्य ही है, क्योंकि उस महान् पिश्टपेशण का यह भी एक अपरिहार्य अंग है। कारण वह घट रह है।


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इस धरा के किसी पुच्छल तारे से टकराने भर की देरी है कि पुनः तेजोमेध-सभी निरर्थक! डसी प्रकार उसी का और उसी के एक आवश्यक एवं अपरिहार्य अटल हिस्से के रूप में बनी-बनाई बंधी हुई रस्सी खोलकर उसे कूटना-यह है हमारा पिश्टपेशण। यदि वह महान पिश्टपेशण महत्तवपूर्ण हो, कुछ असहमति रखता हो, यदि उसमें जीवन निरर्थक न हो, तो यह भी एक छोटा सा पिश्टपेशण कर्तव्य ही है, क्योंकि उस महान् पिश्टपेशण का यह भी एक अपरिहार्य अंग है। कारण वह घट रह है।


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