मैं जटाओं को कूटने लगा। हवलदार और वह बंदी यह देखने वहीं खड़े रहे कि मैं यह काम कर सकता हूं या नहीं, और मेरा मन बहलाने के लिए वे इधर उधर की गप्पें हांकने लगे-
‘‘महाराज, आपको यह ज्ञात नहीं होगा, जब तिलक¹ और आगरकर को दंड हुआ था जब उन्हें इसी कोठरी में रखा गया था। वे जब आपस में बहस करते तब जोर जोर से बोलने लगते। तब कभी कभी उन्हें चेतावनी देनी पड़ती कि धीरे बोलो।’’
’’पर वे आपकी बात सुनते थे या उलटे आप पर ही तनिक झुंझलाते,
मैं जटाओं को कूटने लगा। हवलदार और वह बंदी यह देखने वहीं खड़े रहे कि मैं यह काम कर सकता हूं या नहीं, और मेरा मन बहलाने के लिए वे इधर उधर की गप्पें हांकने लगे-
‘‘महाराज, आपको यह ज्ञात नहीं होगा, जब तिलक¹ और आगरकर को दंड हुआ था जब उन्हें इसी कोठरी में रखा गया था। वे जब आपस में बहस करते तब जोर जोर से बोलने लगते। तब कभी कभी उन्हें चेतावनी देनी पड़ती कि धीरे बोलो।’’
’’पर वे आपकी बात सुनते थे या उलटे आप पर ही तनिक झुंझलाते,