मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

पर फिर धीमी आवाज में बतियाने लगते अथवा चुप हो जाते। और वे वाई के पत्रकार-हां-हां, वही जो आप कह रहे हैं- वृद्व लेले- जो कुबड़े थे, वे भी यहीं पर साधारण बंदी थे। उनकी बुद्वि बड़ी कल्पनाशील थी। इधर खटमलों की भरमार हो गई थी। लेले बहुत झुंझलाते। वस्त्र मिलते, उन्होंने उनमें से एक महीन परंतु सघन चादर निकाली और वे उसकी, जैसे तकिये की बनाते हैं, आच्छादन की खोल सीने लगे। हमने यूं ही पूछा,’ष्शास्त्रीजी, यह क्या सिलाई कर रहे हैं? साहब बिगड़ेगा।’ उन्होंने कहा,


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पर फिर धीमी आवाज में बतियाने लगते अथवा चुप हो जाते। और वे वाई के पत्रकार-हां-हां, वही जो आप कह रहे हैं- वृद्व लेले- जो कुबड़े थे, वे भी यहीं पर साधारण बंदी थे। उनकी बुद्वि बड़ी कल्पनाशील थी। इधर खटमलों की भरमार हो गई थी। लेले बहुत झुंझलाते। वस्त्र मिलते, उन्होंने उनमें से एक महीन परंतु सघन चादर निकाली और वे उसकी, जैसे तकिये की बनाते हैं, आच्छादन की खोल सीने लगे। हमने यूं ही पूछा,’ष्शास्त्रीजी, यह क्या सिलाई कर रहे हैं? साहब बिगड़ेगा।’ उन्होंने कहा,


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