दिन प्रातःकाल लगभग आठ बजे वे पठान वाॅर्डर जल्दी-जल्दी मेरी कोठरी के सामने आकर बोले,‘‘साहब आता है, खड़े रहो।’’ मैं द्वार के निकट आ गया। द्वार अर्थात् कोठरी की सलाखों का नित्य बंद रहनेवाला द्वार। बारी साहब अपने साथ और कुछ गोरे लोग लेकर आए थे। उस कारागृह में मेरा आगमन होने से बारी साहब को एक नया महत्तव प्राप्त हो गया था। तत्रस्थ यूरोपियन स्त्री-पुरूषों की मुझे देखने तथा यथासंभव मेरे साथ थोड़ा संभाषण करने की इच्छा होती थी।
दिन प्रातःकाल लगभग आठ बजे वे पठान वाॅर्डर जल्दी-जल्दी मेरी कोठरी के सामने आकर बोले,‘‘साहब आता है, खड़े रहो।’’ मैं द्वार के निकट आ गया। द्वार अर्थात् कोठरी की सलाखों का नित्य बंद रहनेवाला द्वार। बारी साहब अपने साथ और कुछ गोरे लोग लेकर आए थे। उस कारागृह में मेरा आगमन होने से बारी साहब को एक नया महत्तव प्राप्त हो गया था। तत्रस्थ यूरोपियन स्त्री-पुरूषों की मुझे देखने तथा यथासंभव मेरे साथ थोड़ा संभाषण करने की इच्छा होती थी।