अतः उन्हें बारी साहब की आरती उतारने के अतिरिक्त अन्य कोई उपाय ही नहीं रहता। काफी अनुनय-विनय करने के पश्चात् अत्यंत सावधानी के साथ, गुपचुप बारी साहब उन्हें बंदीगृह में ले आते और मुझसे भेंट करवाकर अथवा दूर से मुझे दिखाकर इस तरह गंभीर मुद्रा बनाते कि तुम लोगों पर पहाड़ जैसा विशाल उपकार किया, अब मै। इस विवेचना में गर्क हूं कि इसके आगे इसे कैसे पार करूं। ‘ज्ींज ूपसस कव! ज्ींज ूपसस कव!’ कहते हुए वे अतिथियों को लेकर झट से वापस
अतः उन्हें बारी साहब की आरती उतारने के अतिरिक्त अन्य कोई उपाय ही नहीं रहता। काफी अनुनय-विनय करने के पश्चात् अत्यंत सावधानी के साथ, गुपचुप बारी साहब उन्हें बंदीगृह में ले आते और मुझसे भेंट करवाकर अथवा दूर से मुझे दिखाकर इस तरह गंभीर मुद्रा बनाते कि तुम लोगों पर पहाड़ जैसा विशाल उपकार किया, अब मै। इस विवेचना में गर्क हूं कि इसके आगे इसे कैसे पार करूं। ‘ज्ींज ूपसस कव! ज्ींज ूपसस कव!’ कहते हुए वे अतिथियों को लेकर झट से वापस