चले जाते। मुझे ऐसे कई गोरे सार्जेंट तथा महिलाओं के उदाहरण ज्ञात हैं जो यह स्वर्ण अवसर पाने के लिए पंद्रह-पंद्रह दिन बारी साहब की कोठी पर उनकी अनुनय-विनय करते रहे थे।
‘‘सरकार!’’ वाॅर्डर के चिल्लाते ही मैं वहां के नियमानुसार सीधा खड़ा रहा। कोठरी की सलाखों के छोटे द्वार में से बारी साहब के दिखने के पहले ही उनकी निकली हुई तोंद दिखाई देने लगती। क्योंकि उनकी वह तोंद, जो उनके संपूर्ण शरीर को पछाड़ती हुई और संपूर्ण विश्व को तुच्छतापूर्वक चुनौति देती हुई दिखती थी,
चले जाते। मुझे ऐसे कई गोरे सार्जेंट तथा महिलाओं के उदाहरण ज्ञात हैं जो यह स्वर्ण अवसर पाने के लिए पंद्रह-पंद्रह दिन बारी साहब की कोठी पर उनकी अनुनय-विनय करते रहे थे।
‘‘सरकार!’’ वाॅर्डर के चिल्लाते ही मैं वहां के नियमानुसार सीधा खड़ा रहा। कोठरी की सलाखों के छोटे द्वार में से बारी साहब के दिखने के पहले ही उनकी निकली हुई तोंद दिखाई देने लगती। क्योंकि उनकी वह तोंद, जो उनके संपूर्ण शरीर को पछाड़ती हुई और संपूर्ण विश्व को तुच्छतापूर्वक चुनौति देती हुई दिखती थी,