उस गुब्बारे की तरह गोल-मटोल, जो स्कूलों में पृथ्वी का आकार दिखाने के लिए रखा जाता है, दो कदम अनके आगे भागती और उनकी इस तोंद पर मध्य तक चढ़ाए हुए पाजामे पर वह चमड़े का पट्टा भमध्य रेखा की तरह शोभा देता।
सन् 1857 के विद्रोह की चर्चा
बारी साहब ने प्रारंभ किया, ‘‘लोगों ने आपको बताया ही होगा कि मैं आपका बंदीपाल (श्रंपसमत) हूं’’ मैंने केवल सस्मित देखा। ‘‘परंतु मैं आपसे कहता हूं कि मैं आपका एक मित्र हूं।’’ साथ में आए हुए अतिथि मौन थे,
उस गुब्बारे की तरह गोल-मटोल, जो स्कूलों में पृथ्वी का आकार दिखाने के लिए रखा जाता है, दो कदम अनके आगे भागती और उनकी इस तोंद पर मध्य तक चढ़ाए हुए पाजामे पर वह चमड़े का पट्टा भमध्य रेखा की तरह शोभा देता।
सन् 1857 के विद्रोह की चर्चा
बारी साहब ने प्रारंभ किया, ‘‘लोगों ने आपको बताया ही होगा कि मैं आपका बंदीपाल (श्रंपसमत) हूं’’ मैंने केवल सस्मित देखा। ‘‘परंतु मैं आपसे कहता हूं कि मैं आपका एक मित्र हूं।’’ साथ में आए हुए अतिथि मौन थे,