क्यांेकि बारी साहब प्रत्यक्ष बोलने का अधिकार अपने विशेष चमचे को ही देता, अन्य लोगों को नहीं।’’ मुझे आप जैसे शिक्षित, पढे़-लिखे मनुष्य से संभाषण करना बड़ा अच्छा लगता है। अतः मैं इस तरह कभी-कभी यंू ही खुलकर वार्त्तालाप करने आ जाता हूं। आपने सन् 1857 के उस
दुष्टतापूर्ण विद्रोह का इतिहास लिखा है न्’’¹ वे जब बोल रहे थे मैं केवल सस्मित मुद्रा में देख रहा था। मैंने भांप लिया कि महाशय टओलने पधारे हुए हैं और ऐसा प्रतीत होता
क्यांेकि बारी साहब प्रत्यक्ष बोलने का अधिकार अपने विशेष चमचे को ही देता, अन्य लोगों को नहीं।’’ मुझे आप जैसे शिक्षित, पढे़-लिखे मनुष्य से संभाषण करना बड़ा अच्छा लगता है। अतः मैं इस तरह कभी-कभी यंू ही खुलकर वार्त्तालाप करने आ जाता हूं। आपने सन् 1857 के उस
दुष्टतापूर्ण विद्रोह का इतिहास लिखा है न्’’¹ वे जब बोल रहे थे मैं केवल सस्मित मुद्रा में देख रहा था। मैंने भांप लिया कि महाशय टओलने पधारे हुए हैं और ऐसा प्रतीत होता