है कि मेरी सामान्य प्रवृत्तिा को देखना ही उनका उद्देश्य है। मैं भी सोच रहा था’ चलो, उनकी बात सुनने में समय का भार तो तनिक हलका होगा, जो इस काल कोठरी में भारी हो गया है। मैंने कहा, ‘‘यह सच है कि उस विषय पर मैंने ढेर सारी पुस्तकें पढ़ी हैं।’’ उन्हांेने कहा,‘‘ तो फिर ऐसे दुष्ट लोगों से आपको घिन नहीं आती? क्या थी उनकी पैशाचिक क्रूरता। मेरे पिता स्वयं उस विद्रोह में फंस गए थे। वे हमें बताया करते, ‘उस अधम नाना साहब ने कानपुर
है कि मेरी सामान्य प्रवृत्तिा को देखना ही उनका उद्देश्य है। मैं भी सोच रहा था’ चलो, उनकी बात सुनने में समय का भार तो तनिक हलका होगा, जो इस काल कोठरी में भारी हो गया है। मैंने कहा, ‘‘यह सच है कि उस विषय पर मैंने ढेर सारी पुस्तकें पढ़ी हैं।’’ उन्हांेने कहा,‘‘ तो फिर ऐसे दुष्ट लोगों से आपको घिन नहीं आती? क्या थी उनकी पैशाचिक क्रूरता। मेरे पिता स्वयं उस विद्रोह में फंस गए थे। वे हमें बताया करते, ‘उस अधम नाना साहब ने कानपुर