की रचना करना जो पीछे आरंभ की थी। बीच के कालखंड में समुद्र यात्रा की हड़बड़ाहट में वह काम ठपप हो गया था, क्यांेकि वहां बात करने तथा पढ़ने के लिए मिल जाने के कारण लोगों में विचारों का प्रसारण करने का दूसरा कार्य संभव हो सका था। कविता-रचना करने का
निश्चय करते ही मन मे सोचा, मराठी में अनुष्टुप् छंद का प्रचार लुप्तप्राय ही हो गया है। यह इीक नहीं। इस मधुर परिचित और काव्य विधा के लिए अनुकूल अनुष्टुप् की, जिसमें रामायण-महाभारत जैसे महाकाव्य का गान किया जाता है,
की रचना करना जो पीछे आरंभ की थी। बीच के कालखंड में समुद्र यात्रा की हड़बड़ाहट में वह काम ठपप हो गया था, क्यांेकि वहां बात करने तथा पढ़ने के लिए मिल जाने के कारण लोगों में विचारों का प्रसारण करने का दूसरा कार्य संभव हो सका था। कविता-रचना करने का
निश्चय करते ही मन मे सोचा, मराठी में अनुष्टुप् छंद का प्रचार लुप्तप्राय ही हो गया है। यह इीक नहीं। इस मधुर परिचित और काव्य विधा के लिए अनुकूल अनुष्टुप् की, जिसमें रामायण-महाभारत जैसे महाकाव्य का गान किया जाता है,