किया था। हमारे स्मृत गण में उच्चारण हुआ’ अक्षरे चरणी आठ’ तो फिर अनुष्टुप् को ‘एक गण नियम नहीं’ पद प्रथम देते हुए फिर नियम का पद ग्रहण कर वृत्तदर्पणकारों ने कैसा चकमा दिया। आठ अक्षरों के नियम का स्मरण होते ही सारी गं्रथियां ठीक-ठीक बैठ गई। परंतु अपने रचे हुए अ अनुष्टुप् की ओर दृष्टि डाली जाए तो मजे-ही-मजे। किसी के चरण में आठ अक्षर तो किसी के दस तो किसी के बीस। किसी का किसी से मेल नहीं। अर्थात् इन सारे अनुष्टुप् की द्वितीय आवत्तिा करने पर भी यह समाप्त नहीं हुआ,
किया था। हमारे स्मृत गण में उच्चारण हुआ’ अक्षरे चरणी आठ’ तो फिर अनुष्टुप् को ‘एक गण नियम नहीं’ पद प्रथम देते हुए फिर नियम का पद ग्रहण कर वृत्तदर्पणकारों ने कैसा चकमा दिया। आठ अक्षरों के नियम का स्मरण होते ही सारी गं्रथियां ठीक-ठीक बैठ गई। परंतु अपने रचे हुए अ अनुष्टुप् की ओर दृष्टि डाली जाए तो मजे-ही-मजे। किसी के चरण में आठ अक्षर तो किसी के दस तो किसी के बीस। किसी का किसी से मेल नहीं। अर्थात् इन सारे अनुष्टुप् की द्वितीय आवत्तिा करने पर भी यह समाप्त नहीं हुआ,