मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

क्यांेकि केवल आठ अक्षर गिन लेने पर भी कभी-कभी वह अनुष्टुप् की चाल से किसी भी तरह से नहीं चल रहा था और धप्प से बैठ जाता था। पहले श्रुति सुख से चकमा दिया तो अब शास्त्र-नियमो ने उदाहरणार्थ ‘सलिलात् नदीच्या त्या प्रतिबिबिंत जी पद्ये’ (नदी के जिस पानी में वे पद्य प्रतिबिबिंत हो रहे थे)-इस चरण में आठ-आठ अक्षर होने से भी वे अंत में अनुष्टुप् की चाल से चलने में स्पष्ट विरोध करते हैं। तब कुछ और दिनों के पश्चात्


उपांत्य ह्नस्व


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क्यांेकि केवल आठ अक्षर गिन लेने पर भी कभी-कभी वह अनुष्टुप् की चाल से किसी भी तरह से नहीं चल रहा था और धप्प से बैठ जाता था। पहले श्रुति सुख से चकमा दिया तो अब शास्त्र-नियमो ने उदाहरणार्थ ‘सलिलात् नदीच्या त्या प्रतिबिबिंत जी पद्ये’ (नदी के जिस पानी में वे पद्य प्रतिबिबिंत हो रहे थे)-इस चरण में आठ-आठ अक्षर होने से भी वे अंत में अनुष्टुप् की चाल से चलने में स्पष्ट विरोध करते हैं। तब कुछ और दिनों के पश्चात्


उपांत्य ह्नस्व


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