मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

‘‘मैं कुछ नहीं जानता।’’ मेरे पहरे पर वह पठान वाॅर्डर, इस तरह के निश्चित विचार में मग्न था कि इतने सक्ष्त बंदोबस्त में कौन आ सकता है भला! इतने में उस पत्थर की आवाज होने से वह उठकर देखने लगा तो उसे वह नीचे खड़ा वाॅर्डर मुझे कुछ संकेत करता हुआ दिखाई दिया। संदेहवश उसने हांक लगाई। उसमें भी वह वाॅर्डर हिंदू था। अतः उसे पकड़कर (पद से) हटाने पर अपने एक पठान को वाॅर्डर बनाने का अवसर मिलता। इसीलिए उसने हंगामा खड़ा किया। मेरी चाली पर नियुक्त वह पेटी अफसर भी मुसलमान ही था,


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‘‘मैं कुछ नहीं जानता।’’ मेरे पहरे पर वह पठान वाॅर्डर, इस तरह के निश्चित विचार में मग्न था कि इतने सक्ष्त बंदोबस्त में कौन आ सकता है भला! इतने में उस पत्थर की आवाज होने से वह उठकर देखने लगा तो उसे वह नीचे खड़ा वाॅर्डर मुझे कुछ संकेत करता हुआ दिखाई दिया। संदेहवश उसने हांक लगाई। उसमें भी वह वाॅर्डर हिंदू था। अतः उसे पकड़कर (पद से) हटाने पर अपने एक पठान को वाॅर्डर बनाने का अवसर मिलता। इसीलिए उसने हंगामा खड़ा किया। मेरी चाली पर नियुक्त वह पेटी अफसर भी मुसलमान ही था,


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