दमघोंटू राह! क्ेवल यह बता देना कि अपने साथी कौन-कौन हैं? ‘जो है सो कह डालो’-ये अक्षर छपी हुई पट्टी इस राह पर नित्य लटकती दिखाई देती थी। उनके इस टूटे मनोबल की जानकारी भी उन्हीं के एक मित्र ने अधिकारियों को दे दी। वह मित्र भी वैसी ही अवस्था से मुक्ति पाने के लिए इस राह पर चल पड़ा था। कोई कहता, यह समाचार ऊपर ठेठ कलकत्ता तक भेजा गया, फिर उन्हें सब्ज बाग दिखाए गए। डूबते को तिनके का सहारा होता है। विश्वास न होते हुए भी उन्होंने
दमघोंटू राह! क्ेवल यह बता देना कि अपने साथी कौन-कौन हैं? ‘जो है सो कह डालो’-ये अक्षर छपी हुई पट्टी इस राह पर नित्य लटकती दिखाई देती थी। उनके इस टूटे मनोबल की जानकारी भी उन्हीं के एक मित्र ने अधिकारियों को दे दी। वह मित्र भी वैसी ही अवस्था से मुक्ति पाने के लिए इस राह पर चल पड़ा था। कोई कहता, यह समाचार ऊपर ठेठ कलकत्ता तक भेजा गया, फिर उन्हें सब्ज बाग दिखाए गए। डूबते को तिनके का सहारा होता है। विश्वास न होते हुए भी उन्होंने