मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

उनके भुलावे पर विश्वास किया। एक दिन वह नाटक करने की ठानकर उस द्वीप का एक मुख्याधिकारी कारागृह में आ गया। राजबंदी कोल्हू में जुते ही थे। उस अधिकारी के सामने आते ही, बंद कोठरी के छोटे द्वार के निकट आकर वे चिल्लाए, ‘‘निवेदन।’’ वह अधिकारी शेखी बघारते हुए ‘ ॅींज कव लवन ूंदजघ्’ कहता हुआ थोड़ा घूमकर द्वार के निकट खड़ा रहा। वे सज्जन घुटने टेककर, हाथ जोड़कर’ कुछ भी


करो, परंतु मुझे इन नरक-यातनाओं से मुक्त करो’-ऐसी करूणाजनक प्रार्थना करने लगे। अधिकारी ने उत्तर दिया,


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उनके भुलावे पर विश्वास किया। एक दिन वह नाटक करने की ठानकर उस द्वीप का एक मुख्याधिकारी कारागृह में आ गया। राजबंदी कोल्हू में जुते ही थे। उस अधिकारी के सामने आते ही, बंद कोठरी के छोटे द्वार के निकट आकर वे चिल्लाए, ‘‘निवेदन।’’ वह अधिकारी शेखी बघारते हुए ‘ ॅींज कव लवन ूंदजघ्’ कहता हुआ थोड़ा घूमकर द्वार के निकट खड़ा रहा। वे सज्जन घुटने टेककर, हाथ जोड़कर’ कुछ भी


करो, परंतु मुझे इन नरक-यातनाओं से मुक्त करो’-ऐसी करूणाजनक प्रार्थना करने लगे। अधिकारी ने उत्तर दिया,


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