मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas



उस दिन हमारे उस पठान वाॅर्डर का-वह बाजार देखते ही नीचे जाकर थोड़ा पानी पीकर दो-तीन गोले मुख शुद्वि के तौर में डालने के लिए -जी ललचाना स्वाभाविक था। बेचारा मेरे साथ ही उस सातवें क्रमांक की इमारत के तीसरे तल्ले पर बंदी हो गया था और उस एकांतवास से ऊब गया था। अच्छा, मुझपर नियुक्त वह वाॅर्डर अधिकारियों का पिट्ठू! उससे कौन नहीं डरेगा? उसके नारियल मांगते ही कौन उसे गुपचुप गरी निकालकर नहीं देगा? दोपहर में पेटी अफसर, वह भी पठान


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उस दिन हमारे उस पठान वाॅर्डर का-वह बाजार देखते ही नीचे जाकर थोड़ा पानी पीकर दो-तीन गोले मुख शुद्वि के तौर में डालने के लिए -जी ललचाना स्वाभाविक था। बेचारा मेरे साथ ही उस सातवें क्रमांक की इमारत के तीसरे तल्ले पर बंदी हो गया था और उस एकांतवास से ऊब गया था। अच्छा, मुझपर नियुक्त वह वाॅर्डर अधिकारियों का पिट्ठू! उससे कौन नहीं डरेगा? उसके नारियल मांगते ही कौन उसे गुपचुप गरी निकालकर नहीं देगा? दोपहर में पेटी अफसर, वह भी पठान


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