होने के कारण संकेत करके इमारत का द्वार खोलकर नीचे आंगन में गए। पानीवाले नारियल के दो-तीन नरम-नरम गोले तुड़वाकर उन्होंने गटगट करके अपने पेट में उंड़ेले। अब शेष रह गई मुख शुद्वि। नित्य के नियमानुसार बंदियों की जो लंबी पंक्ति बैठी हुई थी, उधर जाकर नरेलियों से (गोले की खोपड़ियों से) गोला गोड़कर एक को धमकी दी,‘‘हाथ चलाओ!’’ वाॅर्डर को देखकर समपकाता हुआ वह बंदी हाथ चला ही रहा था, अर्थात् अपना काम करने ही लगा था कि वाॅर्डर महाशय
होने के कारण संकेत करके इमारत का द्वार खोलकर नीचे आंगन में गए। पानीवाले नारियल के दो-तीन नरम-नरम गोले तुड़वाकर उन्होंने गटगट करके अपने पेट में उंड़ेले। अब शेष रह गई मुख शुद्वि। नित्य के नियमानुसार बंदियों की जो लंबी पंक्ति बैठी हुई थी, उधर जाकर नरेलियों से (गोले की खोपड़ियों से) गोला गोड़कर एक को धमकी दी,‘‘हाथ चलाओ!’’ वाॅर्डर को देखकर समपकाता हुआ वह बंदी हाथ चला ही रहा था, अर्थात् अपना काम करने ही लगा था कि वाॅर्डर महाशय