था। नित्य के अनुभव से उसने यह गांठ में बांध रखा था। एक मद्रासी बंदी के पास छिपाया हुआ दही नारियल था, जिसका ऊपर उल्लेख हो चुका है। यह बंदी नया-नया आया था। वाॅर्डर महाशय झट से वहां पहुंच गए और उन्हांेने आज्ञा दी, ‘‘लाओ साला नारियल इधर।’’ परंतु वह मद्रासी अपनी ही अकड़ में था। मद्रास इलाके का यह एक नामचीन डाकू था। कई बार तमिल जेल की हवा खाकर ढीठ बना हुआ था। अब पहली बार कालेपानी पर आया था। वह भी दस वर्षाें के लिए, अतः कुछ अधिक
था। नित्य के अनुभव से उसने यह गांठ में बांध रखा था। एक मद्रासी बंदी के पास छिपाया हुआ दही नारियल था, जिसका ऊपर उल्लेख हो चुका है। यह बंदी नया-नया आया था। वाॅर्डर महाशय झट से वहां पहुंच गए और उन्हांेने आज्ञा दी, ‘‘लाओ साला नारियल इधर।’’ परंतु वह मद्रासी अपनी ही अकड़ में था। मद्रास इलाके का यह एक नामचीन डाकू था। कई बार तमिल जेल की हवा खाकर ढीठ बना हुआ था। अब पहली बार कालेपानी पर आया था। वह भी दस वर्षाें के लिए, अतः कुछ अधिक