मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

भयभीत भी नहीं था। साथ ही उसे हिंदुस्थानी भाषा का अत्यल्प ज्ञान होने के कारण


‘इल्ले इल्ले’ अर्थात् ‘नहीं-नहीं’ कहते हुए चतुराई से निभाने की सुविधा प्राप्त थी, जिसे मद्रासी दंडित अपना जन्मसिद्व अधिकार समझते। अतः वाॅर्डर की उस उद्वत आज्ञा का उसने तनिक अक्खड़पन से उत्तर दिया, ‘इल्ले’। वह दही नारियल उसने पूरे एक आने की तंबाकू देकर उससे गुपचुप खरीदा था, जो नारियल तोड़ता है। उसके जैसा ढीठ बंदीवान उस वाॅर्डर को सहजतापूर्वक थोड़े


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भयभीत भी नहीं था। साथ ही उसे हिंदुस्थानी भाषा का अत्यल्प ज्ञान होने के कारण


‘इल्ले इल्ले’ अर्थात् ‘नहीं-नहीं’ कहते हुए चतुराई से निभाने की सुविधा प्राप्त थी, जिसे मद्रासी दंडित अपना जन्मसिद्व अधिकार समझते। अतः वाॅर्डर की उस उद्वत आज्ञा का उसने तनिक अक्खड़पन से उत्तर दिया, ‘इल्ले’। वह दही नारियल उसने पूरे एक आने की तंबाकू देकर उससे गुपचुप खरीदा था, जो नारियल तोड़ता है। उसके जैसा ढीठ बंदीवान उस वाॅर्डर को सहजतापूर्वक थोड़े


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