हुए अपना-अपना स्ािान पकड़कर तमाशा देखते रहे। मुझे तो ऊपर से सलाखों के निकट
खड़े रहकर यह देखते ही बड़ी हंसी लगी। वाॅर्डर महाशय की वह पठानी टोपी, वह साफा जिसे देखकर पूरा जेल सिर से पांव तक कांप उठता था, कहीं-का-कहीं पड़ा था और वह मद्रासी होंठों-ही-होंठों में कुछ तमिल शब्द बुदबुदाता हुआ उसकी दाढ़ी मरोड़ता, मुक्कों-पर-मुक्के मारता हुआ उसकी छाती पर सवार था। वाॅर्डर महाशय की क्या मजाल जो उसे ‘काफिर’ कहे, चुपचाप दही नारियल के स्ािान
हुए अपना-अपना स्ािान पकड़कर तमाशा देखते रहे। मुझे तो ऊपर से सलाखों के निकट
खड़े रहकर यह देखते ही बड़ी हंसी लगी। वाॅर्डर महाशय की वह पठानी टोपी, वह साफा जिसे देखकर पूरा जेल सिर से पांव तक कांप उठता था, कहीं-का-कहीं पड़ा था और वह मद्रासी होंठों-ही-होंठों में कुछ तमिल शब्द बुदबुदाता हुआ उसकी दाढ़ी मरोड़ता, मुक्कों-पर-मुक्के मारता हुआ उसकी छाती पर सवार था। वाॅर्डर महाशय की क्या मजाल जो उसे ‘काफिर’ कहे, चुपचाप दही नारियल के स्ािान