मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

मनुश्यों पर आज तक ऐसे विकट संकटों का सामना करनेवाले आह्नान आ गिरे हैं और अभी भी इसी प्रकार के अथवा इससे भी भयानक आह्नान आ गिरनेवाले हैं। इस जीवन-कलह के नगाड़े के कोलाहल के बीच हम अपनी


इतनी सी हलगी क्यों बजाते रहें?

दुःख के गले में आक्रोश का ढोल तो कुदरत ने ही लटका दिया है, ताकि उसे बजाकर वह अपना यथासंभव मनोरंजन कर सके। बाज ने निशाना लगाते ही विवश हो उसकी चांेच के अंदर ही फंसा हुआ पंछी- सहायता की लेशमात्र आशा न होते हुए भी- जो स्वाभाविक चीख् निकालता है,


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मनुश्यों पर आज तक ऐसे विकट संकटों का सामना करनेवाले आह्नान आ गिरे हैं और अभी भी इसी प्रकार के अथवा इससे भी भयानक आह्नान आ गिरनेवाले हैं। इस जीवन-कलह के नगाड़े के कोलाहल के बीच हम अपनी


इतनी सी हलगी क्यों बजाते रहें?

दुःख के गले में आक्रोश का ढोल तो कुदरत ने ही लटका दिया है, ताकि उसे बजाकर वह अपना यथासंभव मनोरंजन कर सके। बाज ने निशाना लगाते ही विवश हो उसकी चांेच के अंदर ही फंसा हुआ पंछी- सहायता की लेशमात्र आशा न होते हुए भी- जो स्वाभाविक चीख् निकालता है,


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