मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

उस चीख से लेकर, नेपोलियन का श्शव सेंट हेलिना से पेरिस जिसे दिन लाया गया, उस दिन एक पूरा-का-पूरा राश्ट्र अपने ध्वजों को झुकाए, अपने हजारों वाद्यों से हजारों शोक -स्वर तथा विरह गीतों को गाते हुए दुःख और आक्रोश का जो प्रकटीकरण कर रहा था-उस आक्रोश तक, उस राश्ट्रीय स्ुूर्तिगान तक, जितना भी प्राणिसृश्टि का आक्रोश है, उतना सब अपने-अपने दुःख को सर्वज्ञात करने में मग्न होता है। आक्रोश दुःख का स्वभाव ही है, सो इस अनंत अंतराल में


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उस चीख से लेकर, नेपोलियन का श्शव सेंट हेलिना से पेरिस जिसे दिन लाया गया, उस दिन एक पूरा-का-पूरा राश्ट्र अपने ध्वजों को झुकाए, अपने हजारों वाद्यों से हजारों शोक -स्वर तथा विरह गीतों को गाते हुए दुःख और आक्रोश का जो प्रकटीकरण कर रहा था-उस आक्रोश तक, उस राश्ट्रीय स्ुूर्तिगान तक, जितना भी प्राणिसृश्टि का आक्रोश है, उतना सब अपने-अपने दुःख को सर्वज्ञात करने में मग्न होता है। आक्रोश दुःख का स्वभाव ही है, सो इस अनंत अंतराल में


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