बाबू संबोधित करने में कोई आपत्तिा नहीं थी, केवल हम राजबंदियों को बाबू संबोधित करने पर आपत्तिा थी, वे बारी साहब हमें राजबंदी अथवा राजकैदी थोड़े की संबोधित करने देंगे?
‘डी’ टिकट
मरते दम तक बारी साहब ने यही रट लगाई थी कि हम पाॅलिटिकल प्रिजनर्स नहीं है। कोई बंदी उनके सामने राजकैदी कह देता तो साहब गरजते, ‘हःयो? कौन राजकैदी? वो भी तुम्हारे माफक ही एक मामूली कैदी है। बदमाश कैदियों का ‘डी’ टिकट देखता नहीं तुम उनकी छाती पर?’
बाबू संबोधित करने में कोई आपत्तिा नहीं थी, केवल हम राजबंदियों को बाबू संबोधित करने पर आपत्तिा थी, वे बारी साहब हमें राजबंदी अथवा राजकैदी थोड़े की संबोधित करने देंगे?
‘डी’ टिकट
मरते दम तक बारी साहब ने यही रट लगाई थी कि हम पाॅलिटिकल प्रिजनर्स नहीं है। कोई बंदी उनके सामने राजकैदी कह देता तो साहब गरजते, ‘हःयो? कौन राजकैदी? वो भी तुम्हारे माफक ही एक मामूली कैदी है। बदमाश कैदियों का ‘डी’ टिकट देखता नहीं तुम उनकी छाती पर?’