जिनके माता-पिता, पत्नी-पुत्रए पूरे परिवार का सर्वनाश हो गया है, जिनके शिश्यों ने उनके प्रति श्शपथपूर्वक उठाई निश्ठा उन्हीं के सिर फोड़ा, फिर भी इस नरकेसरी ने दुःख का हलाहल किसी अपयश का रूद्र सरीखा अवतार धारण कर पचा लिया। गोविंदसिंहजी का यही अपयश आज मेरे भयंकर दुःख तथा पराजय का मेरूदंडवत् आधार बनेगा। यही मेरी पीढ़ी के अपयश, दुःख और पराजय की गहरी नींव पर भावी पीढ़ियों के यशप्रासाद खड़े करेगा।
भावनाओं के मीनार पर आरूढ़ होकर
जिनके माता-पिता, पत्नी-पुत्रए पूरे परिवार का सर्वनाश हो गया है, जिनके शिश्यों ने उनके प्रति श्शपथपूर्वक उठाई निश्ठा उन्हीं के सिर फोड़ा, फिर भी इस नरकेसरी ने दुःख का हलाहल किसी अपयश का रूद्र सरीखा अवतार धारण कर पचा लिया। गोविंदसिंहजी का यही अपयश आज मेरे भयंकर दुःख तथा पराजय का मेरूदंडवत् आधार बनेगा। यही मेरी पीढ़ी के अपयश, दुःख और पराजय की गहरी नींव पर भावी पीढ़ियों के यशप्रासाद खड़े करेगा।
भावनाओं के मीनार पर आरूढ़ होकर