मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

जो अनंत चीखें अपने-अपने दुःख का बोझ हलका करती हुई विचरण कर रही है, उनके मध्य मेरा दुःख भी अभिव्यक्ति का सांस क्यों न छोड़े? इस अनंत अंतराल में मेरे भी आक्रोश के लिए स्ािान होगा। ऐसा सोचकर प्रवत्तिा कभी-कभी दुःख को एकबारगी निगलने के लिए तैयार हो जाती थी, परंतु तभी परिस्थिति उसके पांव खींचकर उसे पीछे ढकेल देती थी।

हमारी सद्ययःकालीन परिस्थिति में, हमारे अंदमानवाले अनुभव में जो कुछ बतलाने लायक है, वही विशेश रूप में बताया


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जो अनंत चीखें अपने-अपने दुःख का बोझ हलका करती हुई विचरण कर रही है, उनके मध्य मेरा दुःख भी अभिव्यक्ति का सांस क्यों न छोड़े? इस अनंत अंतराल में मेरे भी आक्रोश के लिए स्ािान होगा। ऐसा सोचकर प्रवत्तिा कभी-कभी दुःख को एकबारगी निगलने के लिए तैयार हो जाती थी, परंतु तभी परिस्थिति उसके पांव खींचकर उसे पीछे ढकेल देती थी।

हमारी सद्ययःकालीन परिस्थिति में, हमारे अंदमानवाले अनुभव में जो कुछ बतलाने लायक है, वही विशेश रूप में बताया


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