मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

लिए सावरकर को घोर अपराधी कहना और उस नाम का अशिश्टता से एकवचनी (तू-तड़ाक) उपपदों से उल्लेख करना एक अमोघ साधन बन गया था। इंग्लैंड में एक अंग्रेज अधिकारी हमारा गौरवपूर्वक उल्लेख करे और इधर हिंदुस्थान में हमें ’तू-तड़ाक’ के बिना बडे़ साहसी समाचार-पत्र भी संबोधन न करें- इसमें उस समाचार-पत्र अथवा व्यक्ति विशेश का दोश नहीं है- मेरे विचार से इससे इसी का निदर्शन होता है कि परतंत्र राश्ट्रों की कैसी दुगर्ति बनी है, वहां मानवता भी कितनी महंगी है!


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लिए सावरकर को घोर अपराधी कहना और उस नाम का अशिश्टता से एकवचनी (तू-तड़ाक) उपपदों से उल्लेख करना एक अमोघ साधन बन गया था। इंग्लैंड में एक अंग्रेज अधिकारी हमारा गौरवपूर्वक उल्लेख करे और इधर हिंदुस्थान में हमें ’तू-तड़ाक’ के बिना बडे़ साहसी समाचार-पत्र भी संबोधन न करें- इसमें उस समाचार-पत्र अथवा व्यक्ति विशेश का दोश नहीं है- मेरे विचार से इससे इसी का निदर्शन होता है कि परतंत्र राश्ट्रों की कैसी दुगर्ति बनी है, वहां मानवता भी कितनी महंगी है!


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