ही मै। निढाल होकर भूमि पर लेट गया। देखा तो ऊपर कबूतर के बच्चे अकेलेपन के दुःखित स्वर में आक्रोश व्यक्त कर रहे थे, तड़प्प रहे थे। उनकी मां सवेरे एक साहब की बंदूक का शिकार बन गई थी और बच्चे, हमेशा की तरह वह चोंच मे दाने लेकर अब आएगी, तब आएगी, ऐसी राह देखते देखते निराश और भयभीत हो गए थे तथा वियोग की वेदना से फड़फड़ाते हुए आक्रोश कर रहे थे।
हाय! हाय! मेरे बिछोह की वेदनाओं का यथासंभव जितना चित्रण हो सके
उतना करूण, दारूण
ही मै। निढाल होकर भूमि पर लेट गया। देखा तो ऊपर कबूतर के बच्चे अकेलेपन के दुःखित स्वर में आक्रोश व्यक्त कर रहे थे, तड़प्प रहे थे। उनकी मां सवेरे एक साहब की बंदूक का शिकार बन गई थी और बच्चे, हमेशा की तरह वह चोंच मे दाने लेकर अब आएगी, तब आएगी, ऐसी राह देखते देखते निराश और भयभीत हो गए थे तथा वियोग की वेदना से फड़फड़ाते हुए आक्रोश कर रहे थे।
हाय! हाय! मेरे बिछोह की वेदनाओं का यथासंभव जितना चित्रण हो सके
उतना करूण, दारूण